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कोमल कर किसलय जैसे है

कोमल कर किसलय जैसे है
बैठी लगे तितलियाँ  ।
फूल अभी बनने वाली है लगती है बस कलियाँ ।।
भिण्डी-फल अंगुली मनोहर
छटा कसी कचनार की ।
चन्दा जैसी कान्ति निकलती
अंगूरों के हार की ।।
लाल-लाल पंखुरी मनोहर
मन हिचकोले भरता ।
छुवन मिले तितली के पर सी
जैसे सावन झरता ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र

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5 Comments

Abhinav ji

15-Apr-2023 08:55 AM

Very nice 👍

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बेहतरीन सृजन

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अदिति झा

15-Apr-2023 01:19 AM

Nice 👍🏼

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