कोमल कर किसलय जैसे है
कोमल कर किसलय जैसे है
बैठी लगे तितलियाँ ।
फूल अभी बनने वाली है लगती है बस कलियाँ ।।
भिण्डी-फल अंगुली मनोहर
छटा कसी कचनार की ।
चन्दा जैसी कान्ति निकलती
अंगूरों के हार की ।।
लाल-लाल पंखुरी मनोहर
मन हिचकोले भरता ।
छुवन मिले तितली के पर सी
जैसे सावन झरता ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र
Abhinav ji
15-Apr-2023 08:55 AM
Very nice 👍
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Shashank मणि Yadava 'सनम'
15-Apr-2023 07:36 AM
बेहतरीन सृजन
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अदिति झा
15-Apr-2023 01:19 AM
Nice 👍🏼
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